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सत्ता का दौड़..

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सत्ता एक ऐसा शब्द जो कहने को सिर्फ 3 अक्षर का हैं, लेकिन इसको पाने के लिए तमाम तरह के जुगाड़ लगाए जाते हैं, कभी जाति के नाम पर तो कभी आरक्षण पर हद तो तब हो जाती है जब दंगा करा के जाति संप्रदाए को झुठा सहानुभुति देके वोट बटोरा जाता हैं, लेकिन जमीनी हकीकत पर लोगों के जरूरत को कभी पुरा नहीं किया जाता हैं।

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जब भी चुनाव होते हैं तो राजनितिक दलों के तरकश में सबसे अहम तीर जाति-संप्रदाए को बाँटने का होता हैं, अगर ये तीर सटीक लग गया तो फिर जीत पक्की हैं।

2019 आम चुनाव की आहट चुनाव की सुनायी पड़ने लगी हैं सारी पार्टिया लगभग चुनाव की तैयारी में जुट गई हैं, तमाम तरह के समीकरण बनने लगे हैं, नेताओं का एक दल से दुसरे दल मे आने-जाने का सिलसिला शुरू हो चुका हैं, आरोप प्रत्यारोप का तीर एक-दुसरे पर चल रहा हैं, सियासी बिसात बिछने लगी हैं विपक्षी दल गोलबंद होके अपनी सियासी जमीन की तलाश कर रहे हैं कभी सरकार के नाकामियों को उजागर करने की कोशिश मे हैं तो कभी आरक्षण का ड़र दिखाने में, वहीं सरकार इसका काट ढूढ़ने में लगी है कि कैसे सता में पुनः वापसी की जाए, लेकिन इन सब के बीच जो आम मुद्दा है जैसे बेरोजगारी, भूखमरी, गरीबी य़े सारे मुद्दे गायब हैं।

इन सब के बीच देखना दिलचस्प होगा कि 2019 में सत्ता का चाबी 10  जनपथ के रास्ते या नागपुर के रास्ते जाती हैं।

©raushan199616

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Author:

I'm an ordinary guy with ordinary dreams to whom those small little things in life and love matter the most. I live everyday, learning what life wants to teach me. A lot of me you will like and even more you may dislike. Judge me by how much you know of me or get to know me a little more. I leave the option to you :)

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