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यूपी का रण।।

चुनाव चल रहे हैं। जनता अपनी भावी सरकार चुनने के लिये जोर-शोर से चुनाव में हिस्सा ले रही है। सरकार तो जनता हर बार चुनती है, पर इस बार जनता को उसे चुनना चाहिए, जो उत्तर प्रदेश को दूसरे राज्यों से आगे ले जाये। तो जनता के विकल्प को देखते हैं और देखते हैं कि किस पार्टी से चुनने से जनता और राज्य को क्या फायदा होगा? और जनता को किस पार्टी को और क्यों चुनना चाहिये।

जनता बसपा को सत्ता के लिये चुन सकती है। मायावती जी सत्ता में आने के बाद मूर्तियों के क्षेत्र में अपना अतुलनीय योगदान दे सकती हैं। वो चुनाव जीतने के बाद अपनी और हाथियों की इतनी मूर्ति लगा सकती हैं कि उत्तर प्रदेश मूर्तियों के मामले में अजंता-एलोरा को पीछे छोड़कर पहले नम्बर पर आ जायेगा। और मायावती को जिताना इसलिये भी बनता है, क्योंकि उनके प्रत्याशियों ने बहुत महंगे टिकेट लिये हैं। हम 240 रु का पीवीआर टिकेट लेकर चाहते हैं कि मूवी देखकर इतना इन्जॉय करें कि पूरा पैसा वसूल हो जाये। फिर उन्होंने तो करोड़ो खर्चे हैं, उन्हें सत्ता सुख भोगकर अपने करोड़ो वसूल करने के लिये मौका मिलना ही चाहिये।

अब बात सपा-कांग्रेस की। जनता सपा-कांग्रेस गठबंधन को भी जिता सकती है, ये भी उत्तर प्रदेश को काफी आगे ले जा सकते हैं। सपा की तेल पिलाई लाठी हमेशा ही जनता की उम्मीदों पर खरी उतरी है। सपा की सत्ता में सपा का हर कार्यकर्ता अपने आप में मंत्री रहता है। रेत माफिया तो सपा सरकार के फूफा लगते हैं। लेकिन इस बार सपा से जनता की उम्मीदें कुछ ज्यादा ही बढ़ गई हैं। उत्तर प्रदेश में छोटे मोटे घपले-घोटाले तो होते ही रहते हैं। लेकिन इस बार सपा और कांग्रेस साथ में हैं, तो जनता इनके सत्ता में आने के बाद इनसे एक धमाकेदार विश्वस्तरीय घोटाले की उम्मीद कर सकती है। और इस गठबंधन को जिताने का सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि राहुल बाबा खुश होकर यूपी वालों को पूरे पाँच साल तक एंटरटेन करते रहेंगे।

अब भाजपा की बात। भाजपा तो अल्टीमेट पार्टी है। इसे जिताने का सबसे बड़ा फायदा यूपी की जनता को ये होगा कि फेसबुकिये मठाधीश उत्तर प्रदेश के लोगों को देशभक्ति का सर्टिफिकेट प्रदान कर देंगे। यूपी में अगर जनता भाजपा की सरकार बनवा दे, तो जनता को कुछ फायदा हो न हो पर रामलला को जरूर हो जायेगा। कुछ नहीं तो रामलला को त्रिपाल की जगह रहने के लिये नया तंबू ही मिल जाये। और चूँकि भाजपा के सीएम उम्मीदवार का नाम भी तय नहीं है तो काफी हद तक संभव है कि यूपी की जनता को मनोहर लाल खट्टर की तरह कोई आयातित सीएम मिल जाये। और विकास की बात मत कीजिये। भाजपा की केंद्र में सरकार है तो केंद्र के साथ अच्छे सम्बन्ध होंगे ही, साथ ही ISI से कुछ सम्बन्ध है। इसलिये भाजपा से जनता विकास नहीं, घनघोर विकास की उम्मीद कर सकती है।

और अब बात बामपंथ की भी कर लेते हैं, जो फ़िलहाल लड़ाई में नहीं है। लेकिन अगर बामपंथ यहां बड़े पैमाने पर यहाँ चुनाव लड़ता तो जनता उसे जिताकर उत्तर प्रदेश प्रगतिशीलता के चरम पर पंहुच सकती थी। उत्तर प्रदेश एक झटके में JNU और क्यूबा बन जाता। विकास की जैसी गंगा (गंगा घनघोर बामपंथ के अनुसार सिर्फ एक नदी है, कोई देवी नहीं) 37 सालों तक पश्चिम बंगाल में बही, वैसी ही गंगा झर-झर करके उत्तर प्रदेश में भी बहने लगती। पर अफ़सोस की हमारे दादा लोग बामपंथियों के लिये लाठी में तेल मलकर बैठे रहते हैं। बामपंथ के नाम से ही हमारे यूपी के लोग ऐसे भड़क जाते हैं, जैसे लाल रंग देखकर सांड भड़क जाता है। अगर यूपी की जनता को गरीबी से मुक्ति और विकास का विकल्प चाहिये तो अगले चुनाव में बामपंथ के लिये भी रास्ते खोल देने चाहिये।

लेकिन फिलहाल अभी तो गेंद जनता के के पाले में हैं, वो चाहे जिस पार्टी को जिताकर उस पार्टी और उसके नेताओं का तगड़ा विकास करवा सकती है।

नोट :- अधिकार सुरक्षित 

धन्यवाद 

रौशन

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Author:

I'm an ordinary guy with ordinary dreams to whom those small little things in life and love matter the most. I live everyday, learning what life wants to teach me. A lot of me you will like and even more you may dislike. Judge me by how much you know of me or get to know me a little more. I leave the option to you :)

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